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सावन झाँके  दूर से,बेबस है इंसान  ।
कब तक सोखेगी धरा, धूप हुई हलकान ।।


पढ़-लिख काया  बदल ली,बदले नहीं विचार ।
कौआ  कोयल-भेष में,करता शिष्टाचार ।।


शब्द अर्थ को खो रहे,भटक रहे हैं छंद।
लिखते कुछ,होते अलग,ब्लॉगर-लेखक-वृन्द ।।


तुलसी इस संसार में ,वही बड़ा विद्वान।
खड़ी फ़सल  में आग दे,बोए  निज अभिमान ।।


लिपा-पुता चेहरा दिखे,भोला-सा इन्सान ।
जेबों में मक्कारियाँ ,कर देती हैरान ।।


सूरत धोखा दे रही,संबंधों में खोट ।
रिश्तों में चालाकियाँ ,देती गहरी चोट ।।


पाहुन सावन की तरह,भूले अपना देश ।
मेघ-डाकिया बाँटता ,नित झूठे सन्देश ।।

वर्षा गीत !

वर्षा की रिमझिम बूंदों ने 
मन में नई मिठास भरी,
नए-नए पौधों से सजकर 
सारी धरती हुई हरी ||


सूरज की कठिन चुभन से
तन जब अग्नि समान हुआ,
मेघ-देव से जल-प्रसाद पा 
शीतल,शांत महान हुआ ||


झड़ी लगी जब वर्षा की 
लबालब्ब सब खेत हुए,
कृषकों के नाचे मन-मयूर 
मुदित सभी के हृदय हुए ||


वर्षा-देवी के स्वागत में
सूरज ने गरमी रोकी ,
पशु-पक्षी सारे चहक उठे
आई बहार भी फूलों की ||


हे वर्षा-देवी ! स्वागत-स्वागत 
सूखी धरती पर बार-बार,
तुम आईं ,जीवन आया 
संग में आईं खुशियाँ हज़ार ||




विशेष : रचनाकाल –१८/०६/१९९० 
स्थान: दल्ली-राजहरा (छत्तीसगढ़)

आठ दिन पहले श्रीमती जी का जन्मदिन था.अचानक मुझे याद आया कि यही सही वक्त है जब अपनी बहुत दिनों की एक मुराद पूरी कर ली जाए.दरअसल एक अच्छे कैमरे के लिए मैं काफ़ी दिन से सोच रहा था.सतीश सक्सेना जी से मुलाक़ात के बाद यह तलब और बढ़ गई.उन्होंने जिस अंदाज़ में हमारी ताबड़तोड़ शूटिंग की थी,मैं बिलकुल हैरान और मन्त्र-मुग्ध हो गया था.उनके पास निकोन का बहुत अच्छी क्वालिटी का डी एस एल आर है,मॉडल वही बताएँगे.इसके पहले प्रवीण त्रिवेदी जी और निशांत मिश्र जी के कैमरा-प्रेम को देख चुका था.

कैमरा लेने से पहले मैंने प्रवीण जी और निशांत जी से कई दौर की बात की.इन दोनों लोगों की सलाह काफ़ी उपयोगी लगी.मुझे कैमरे के तकनीकी-पक्ष की कोई जानकारी नहीं थी,अब भी न के बराबर है.हमने अपना बजट बीस हज़ार रूपये के आस-पास बनाया हुआ था.इससे ज़्यादा बजट भी नहीं था और ज़रूरत भी नहीं.निकोन,सोनी,कैनन को देखते-परखते अंततः पैनासोनिक के  FZ 47 को पसंद कर लिया.इसकी अधिकतम कीमत २०९९० रुपये थी और जान-पहचान का हवाला देकर यह मुझे १८५२० रुपये में पड़ा.हालाँकि बाद में प्रवीण जी ने जानकारी दी कि फ्लिपकार्ट वाले इसे १७६०० रूपये में दे रहे हैं.बाद में मैंने चेक किया तो सुलेखा डॉट कॉम में १७२२० रूपये में इसे उपलब्ध बताया जा रहा था.

बहरहाल ,इसे लेकर घर आए तो श्रीमती जी ने सारा दोष हमारे शौक पर मढ  दिया.उन्होंने इतना महंगा और उल-जलूल उपहार लेने से साफ़ इनकार कर दिया.मैंने भी मन में सोचा कि कौन-सा उनके लिए लाया हूँ.खैर.अब उसके फीचर देख लीजिए और कुछ प्रदर्शन भी !साथ ही,जो अनुभवी लोग हैं,उनसे गुज़ारिश है कि वे ज़रूरी टिप्स भी दे दें !

Basic Specifications
Resolution: 12.10 Megapixels
Lens: 24.00x zoom
(25-600mm eq.)
Viewfinder: EVF / LCD
LCD Size: 3.0 inch
ISO: 100-1600
Shutter: 60-1/2000
Max Aperture: 2.8
Dimensions: 4.7 x 3.1 x 3.6 in.
(120 x 80 x 92 mm)
Weight: 18.3 oz (518 g)
includes batteries

विस्तार से इसका रिव्यू यहाँ देखें !

और अब कुछ दृश्य :

रसोई में नाराज श्रीमतीजी !
छतरपुर मंदिर के बाहर 
महिंद्रा XUV 500 के अंदर भतीजा 
भतीजी और भाभी 

प्रणय-गीत

मेरे जीवन की प्रथम-किरण,
         मेरे अंतर की कविता हो,
हृदय अंध में डूब रहा ,
        प्रज्ज्वलित करो तुम सविता हो !


मम भाग्य-विधाता  तुम्हीं  हो,
       तुम बिन जीवन है पूर्ण नहीं,
मेरे अंतर-उद्गारों को ,
      साथी ! करना तुम चूर्ण नहीं !


प्रेरणा तुम्हीं हो कविता की,
      मेरे मानस की अमर-ज्योति,
सत्यता तुम्हारे सम्मुख है,
     नहीं तनिक भी अतिशयोक्ति !


मेरे जीवन की डोर तुम्हीं,
    अपने से अलग नहीं करना,
प्यार तुम्हीं से केवल है,
      अंतर्मन में मुझको रखना !!

पहली बार प्रकाशित :२२/१०/२०१०


विशेष :पहला गीत,रचना-काल-१०/०६/१९८७
 स्थान-फतेहपुर(उ.प्र.)


रीपोस्रिपोस्ट

बादल हमको दे दगा,चले गए उस ओर |
बिन बारिश दम सूखता,नहीं नाचते मोर || (१)


धरती झुलसे उमस से,प्यासे पंछी मौन |
दादुर दर्शन हैं कठिन,अब टर्राये कौन ? (२)


सूखा सावन आ गया,गोरी खड़ी उदास |
झूले खाली पड़े हैं,बिरवा बिना हुलास || (३)


काया पत्थर की हुई,नहीं बरसते नैन |
रूठे बादल-बालमा,सूने हैं दिन-रैन || (४)


खुल्लमखुल्ला कर दिया,मेघों ने ऐलान |
सूरज की साजिश यही,नहीं बचे इंसान || ५)


जामुन काले हो रहे,बचा न उनमें स्वाद |
आम बिना टपके गिरें,मीठापन बर्बाद || (६ )
बरगद बूढ़ा हो गया,सूख गया है आम |
नीम नहीं दे पा रही,राही को आराम ||(१)


कोयल कर्कश कूकती,कौए गाते राग |
सूना-सूना सा लगे,बाबा का यह बाग ||(२)


अम्मा डेहरी बैठकर ,लेतीं प्रभु का नाम |
घर के अंदर बन रहे,व्यंजन खूब ललाम ||(३)


आँगन में दिखते नहीं, गौरैया के पाँव |
गोरी रोज़ मना रही लौटें पाहुन गाँव ||(४)


मनरेगा के नाम पर,मुखिया के घर भोग |
ककड़ी,खीरा छोड़कर,चिप्स चबाते लोग  ||(५)


रामरती दुबली हुई,किसन हुआ हलकान |
बेटा अफ़सर बन गया,रखे शहर का ध्यान ||(६)

कल का दिन हमारी ज़िन्दगी का एक यादगार दिन रहा.परसों अविनाश वाचस्पति जी का फ़ोन आया कि रविवार को ‘एनडीटीवी’ के ‘हम लोग’ कार्यक्रम के लिए निमंत्रण आया है,चलना है तो बताओ.मैंने सहर्ष स्वीकृति दे दी और साथ ही मित्र शाहनवाज़ सिद्दीकी और सानंद रावत जी से चलने के लिए कहा तो वे लोग भी तैयार हो गए.कल करीब ग्यारह बजे हम स्टूडियो पहुँच गए.सभी को केवल मुनव्वर राना से मिलने की बेताबी थी.मेरे लिए अतिरिक्त खुशी थी कि वे मेरे गृह जनपद के ही हैं ! दुर्भाग्यवश अस्वस्थता के चलते अविनाशजी तो नहीं आ पाए पर हम तीनों लोग वहाँ डट गए.

रवीश कुमार जी कार्यक्रम की शुरुआत करें ,इससे पहले ही मुनव्वर जी ने अपने अंदाज़ में चुटकियाँ लेनी शुरू कर दी थीं.पैर में दिक्कत की वज़ह से चार महीने से वे अस्पताल में थे,पर अपनी इस तकलीफ को उन्होंने बड़ी सहजता से लिया.कार्यक्रम शुरू होने पर पहले आध घंटे उन्होंने तरह-तरह के किस्से सुनाये और माँ ,सियासत.मोहब्बत आदि पर शेरो-शायरी सुनाई ! इस कार्यक्रम को विस्तार से यहाँ सुन सकते हैं !

कार्यक्रम के दौरान हमें भी एक सवाल पूछने का मौका मिला,जिसमें मैंने पूछा कि आपको सियासत व सरोकार में सबसे अधिक दिल किस पर शायरी करने का होता है तो उन्होंने बेलौस होकर कहा कि हम शायरी तभी करते हैं जब दिल कहता है | इस तरह कार्यक्रम की समाप्ति के बाद उनसे मिलने के लिए लोग टूट पड़े.हमने उनसे चरण छूकर आशीर्वाद लिया .सबने फोटो भी खिंचवाई. इसके बाद हम सब अविनाशजी के यहाँ उनके हाल लेने गए और शाम को पहली बार अपने को टीवी पर चमकते हुए देखा !

अब देखिये कई दृश्य :

रवीश कुमार कार्यक्रम संचालित करते हुए

मुनव्वर जी माँ को याद करते हुए

दर्शकों के बीच हम

शाहनवाज़ और सानन्दजी के साथ

ज़बरिया हम उनके साथ बैठ ही गए !